ज्योतिषशास्त्र: जीवन का मार्गदर्शक
1. माह में पूर्णिमा व अमावस्य के दिन में से किसी एक दिन कुंडली पर ज्यातिषाचार्य द्वारा कराया जाना चाहिये विशलेषण।
2. मागदर्शक की भूमिका में है ज्योतिषशास्त्र।
3. विशेषज्ञ की मदद से दूर हो सकते हैंे जीवन के विकार।
4 समय-समय पर कुल पुरोहित या गुरू से परामर्श लेने से जीवन की राह होती आसान।
5. मांगलिक होते हैं अत्यधिक भाग्यवान।
6. जीवन की राह में ज्योतिष परामर्श गूगल के नक्शे के है सामान।
7. पुत्र को जबरन हमपेशा बनाने का न करें प्रयास।
आज चैम्बर सभागार में चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल की अध्यक्षता में ज्योतिषाचार्य सैयद इमरान अली जी के साथ बैठक आयोजित की गयी। बैठक का संचालन पूर्व अध्यक्ष मनीष अग्रवाल द्वारा करते हुए बताया गया कि हज़रत सैयदना अमीर अबुल उलाह नक़्शबंदी (अब्बू लाला की दरगाह) की देखरेख संभालने वाले परिवार के सदस्य सैय्यद इमरान अली ने इंटर तक की पढ़ाई शहर के शोबिया इंटर कॉलेज से की। इसके बाद वह रत्न विज्ञान (जेमोलॉजी) सीखने बंग्लूरू चले गए। यहां इस विधा में पढ़ाई के दौरान ही उनका सूफी सुभान से परिचय हुआ। उनकी सरपरस्ती में इल्म-ए-जफ़र का ज्ञान लिया। जिसमें अंकों, अक्षरों और गुप्त विज्ञान सिखाया जाता है। इसके जरिए भविष्य और छिपे हुए रहस्यों का अनुमान लगाया जाता है। यहां आकर रत्नों का कारोबार शुरू किया। इस दौरान ईदगाह रेलवे स्टेशन के पास स्थित मंदिर के पंडित अरुण जोशी से संपर्क हुआ। उनके सानिध्य में वैदिक ज्योतिष की पढ़ाई की। और दिल्ली में ज्योतिष परामर्श देना शुरू कर दिया। लगभग दशक के सफर में अनेकों राजनीतिज्ञ, कॉरपोरेट घराने और प्रोफेशनल ने इनकी सेवाएं ली हैं। लुधियाना में इनको भविष्य दर्पण एस्ट्रोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर द्वारा ज्योतिष सम्राट के खिताब से नवाजा गया। अमृतसर के ज्योतिष जागृति मंच और मुस्लिम एजूकेशन वेलफेयर सोसाइटी की तरफ से इनको सम्मानित किया जा चुका है।
ज्योतिषाचार्य इमरान अली ने बताया कि ग्रह नक्षत्रों की दशा बदलने से हमारे व्यापार, परिवार व हमारे स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है जैस गुरू लग्न में होने पर शनि उचित फल नहीं देता है इसलिये सभी को माह में पूर्णिमा व अमावस्य में से किसी एक दिन ज्योतिष से अपनी कुंडली पर परामर्श लिया जाना चाहिये। उन्होंने बताया कि प्रायः देखा जाता है कि पैतिृक व्यवसाय में पुत्र के व्यावसाय में आने पर व्यापार की ग्रोथ रूक जाती है इसका कारण यह है कि पुत्र के ग्रह व नक्षत्र पैतिृक व्यापार में मिलान न होेने के कारण विपरित प्रभाव पड़ता है इसके लिये जो ग्रह पृतिक व्यापार में पुत्र के लिये कमजोर ग्रह होता है उसको मजबूत करने के लिये ज्योतिष से परामर्श लेना आवश्यक होता है। ज्योतिष में शरीर के तिल का भी विशेष महात्व होता है। माईग्रेन का दर्द शरीर में शनि के कमजोर होने के कारण होता है।
चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल द्वारा रत्न के बारे में जानकारी करने पर उन्होने बताया कि मानव जीवन में रत्नों का विशेष महत्व होता है। रत्न का उपयोग ग्रह की डिग्री/पावर के अनुसार मानव को पहनाया जाता है। इसके लिये जो ग्रह अच्छा है परन्तु कमजोर है उसको मजबूत करने के लिये रत्नों का उपयोग किया जाता है। परन्तु रत्न भी ग्रहों के निरीक्षण करने के उपरन्त ही पहनाये जाते हैंे जैसे मकर राशि वाले पुखराज नहीं पहन सकते तथा माणिक पहनने वाले को हार्ट की समस्या नहीं होती है। उन्होंने कहा कि रत्न के स्थान पर उपरत्न का प्रभाव भी उतना ही होता है जितना रत्न का होता है। मैगनेशियम पावर सभी में एक जैसी होती है। प्रत्येक रत्न की लाईफ अधिकतम 3 वर्ष होती है। सभी को ज्योतिष के परामर्श पर प्राकृतिक रत्न पहनने चाहिये। रत्न कम से कम 7 रत्ती का पहनना ज्यादा फलदायी होता है। ज्योतिषाचार्य जी बताया कि कुंडली में लग्न के स्टार को देखकर ही कुंडली की गणना की जाती है। कालसर्प दोष पर उन्होंने प्रकाश डालते हुए बताया कि काल सर्प योग होना बेहद फलदायी होता है। उन्होने कहा कि रत्न के स्थान पर मंत्रों का सही उच्चारण करके भी रत्नों के समान फल प्राप्त किया जा सकता है। काल सर्प दोष वाले व्यक्ति अधिकतर सरकारी जॉव में होते हैं। और काल सर्प दोष की पूजा सावन माह में अधिक फलदायी होती है इसके लिये पूजा स्वयं भी कर सकते हैं।
पूर्व अध्यक्ष मनीष अग्रवाल द्वारा मांगलिक व नॉन मांगलिक के बारें मे जानकारी करने पर ज्योतिषाचार्य द्वारा बताया गया कि मांगलिक वाले व्यक्ति भाग्यशाली होते हैंे उनका दिल साफ होता है परन्तु थोडे से अधिक गुस्सैल होते हैं। इसलिये मांगलिक व नॉनमांगलिक मायने नहीं रखता है। लव मैरिज में उन्होंने बताया कि लड़का व लड़की द्वारा लव मैरिज पर अधिक जोर देने पर लड़की का नाम बदलवाकर व उसका ग्रहों के अनुसार दान कराकर लवमैरिज को रोका जा सकता है। उन्होने बताया कि बुध कमजोर होने पर हकलाना, दाँत की समस्या, भूलना आदि होता है इसके लिये बरगद के पेड के नीचे प्रतिदिन जल चढ़ाकर उसको मजबूत किया जा सकता है।
ज्योतिषाचार्य जी द्वारा अनेक उपाय चैम्बर के सदस्यों को बताये गये तथा सदस्यों द्वारा अपनी समस्याओं के बारे में समाधान प्राप्त कर अपनी जिज्ञासाओं को शांत किया गया।
बैठक में अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल, उपाध्यक्ष नितेश अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष सीताराम अग्रवाल, मनीष अग्रवाल, श्रीकिशन गोयल, राजीव अग्रवाल, शलभ शर्मा, सदस्य, विजय कुमार गुप्ता, राजेन्द्र कुमार अग्रवाल, चन्द्रवीर सिंह, गोमित जैन, अनिल वार्ष्णेय, नितिन अग्रवाल, राजकुमार भगत, राजेश अग्रवाल, अनूप मितल आदि उपस्थित थे।
















